बागेश्व धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ केस दर्ज, अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगा है. उनके खिलाफ नागपुर में पुलिस केस दर्ज किया गया है. ये केस नागपुर की जादू-टोना विरोध समिति ने दर्ज करवाया है.
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बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री, जिन्हें उनके अनुयायी कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज या बागेश्वर धाम सरकार कहते हैं. इन दिनों एक बड़े विवाद के भंवर में फंसे हुए नजर आ रहे हैं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगा है. उनके खिलाफ नागपुर में पुलिस केस दर्ज किया गया है. ये केस नागपुर की जादू-टोना विरोध समिति ने दर्ज करवाया है. समिति का कहना है कि अगर पुलिस इस मामले में कार्रवाई नहीं करती है तो वो कोर्ट का रुख करेगी. वहीं, धीरेंद्र शास्त्री ने पलटवार करते हुए कहा है कि यह सब धर्म विरोधी लोगों का कारनामा है.
हम वर्षों से बोल रहे हैं कि न हम कोई चमत्कारी हैं: धीरेंन्द्र कृष्ण
धीरेंन्द्र कृष्ण शास्त्री ने चमत्कार को चुनौती देने वालों को जवाब देते हुए कहा, "हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार." नागपुर में कथा कर बागेश्वरधाम लौटे शास्त्री ने कहा, "हम वर्षों से बोल रहे हैं कि न हम कोई चमत्कारी हैं, न हम कोई गुरू हैं.''
धीरेंन्द्र शास्त्री ने चमत्कार के दावे कर कानून का उल्लंघन किया है; जादू-टोना ,समिति
नागपुर की जादू-टोना समिती ने कहा कि धीरेंन्द्र शास्त्री ने चमत्कार के दावे कर कानून का उल्लंघन किया है. मिली जानकारी के मुताबिक जादू-टोना के संस्थापक श्याम मानव ने कहा है कि हमारा संविधान राम कथा या धर्म का प्रचार करने की अनुमति देता है और इसमें कुछ भी गलत नहीं. लेकिन धीरेंद्र कृष्ण ने नागपुर में 7 और 8 जनवरी को आयोजित दिव्य दरबार में चमत्कारी दावे कर कानून का उल्लंघन किया है. समिति संस्थापक का कहना है कि इस दावे का उनके पास वीडियो भी है.
'वो सही साबित हुए तो हम 30 लाख रुपये देंगे': श्याम मानव
श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती भी दी. उन्होंने कहा कि अगर वह सही साबित हुए तो हम 30 लाख रुपये देंगे, लेकिन वह चुनौती को अस्वीकार करते हुए 2 दिन पहले ही कथा खत्म कर चले गए. समिति की मांग है कि धीरेंद्र कृष्ण को गिरफ्तार किया जाए.
जानें क्या है पूरा मामला
बता दे कि नागपुर के रेशीमबाग मैदान में राम चरित्र-चर्चा का आयोजन हुआ जिसमें धीरेंद्र शास्त्री का कथित दिव्य दरबार भी लगना था. कथा की शुरुवात 5 जनवरी को हुई और इसका समापन 13 जनवरी को होना था ,लेकिन 11 जनवरी को इस कथा का अंतिम दिन बता दिया गया और कार्यक्रम समाप्त हो गया. कारण बताया गया कि अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष श्याम मानव ने 'दिव्य दरबार' और 'प्रेत दरबार' की आड़ में धीरेंद्र शास्त्री पर ‘जादू-टोना’को बढ़ावा देने का आरोप लगा दिया था.
महाराष्ट्र में जादू टोने के खिलाफ कानून है, जिसे कहा जाता है Maharashtra Anti-Superstition and Black Magic Act (2013) इसके अलावा समिति ने कहा कि वो उन लोगों के बीच दिव्य चमत्कारी दरबार लगाए और अगर वो ये दावा करते हैं कि सबके बारे में सब जान लेते हैं, तो उनका सच बताएं. अगर वो उनके बारे में सच-सच बता देते हैं, तो वो उसे भेंट स्वरूप 30 लाख रुपए देंगे. लेकिन धीरेंद्र ने चैलेंज स्वीकार नहीं किया. धीरेंद्र शास्त्री कहना है कि उन्हें तो चुनौती मिली ही नहीं.