जानिए कैसे और कब हुई हैवोलीन की शुरुआत, आखिर क्यों होता है इस दिन कद्दू का इस्तेमाल

हैलोवीन डे भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में काफी जबरदस्त तरीके से मनाया जाता है। आइए यहां जानते हैं क्या है इसका इतिहास और कद्दू से इसका ताल्लुक।

जानिए कैसे और कब हुई हैवोलीन की शुरुआत, आखिर क्यों होता है इस दिन कद्दू का इस्तेमाल
हैलोवीन से संबंधित (क्रेडिट- ट्विटर)

हैलोवीन को लोग डरवानी और मजेदार दिन के तौर पर मनाते हुए नजर आते हैं। इस शब्द का मतलब वैसे पवित्र शाम होता है। इतना ही नहीं इसे तो ऑल सेंट्स डे के तौर पर भी लोग पहचानते हैं। ये 31 अक्टूबर के दिन माने जाने वाले त्योहार है जिसे हर साल बेहद ही शानदार तरीके से मनाया जाता है। इस दुनिया भर के कई बड़े देशों में बेहद ही धूमधाम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है जिसमें यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, कनाड़ा और टोक्यो शामिल है। 

इस दिन कई लोग डरावने कपड़े पहने अपने दोस्तों के साथ इस दिन को एंजॉय करते हुए नजर आते हैं। ये दिन वैसे बहुत कम लोगों को पता है कि पश्चिमी ईसाइयों और गैर-ईसाइयों द्वारा सेलिब्रेट किया जाता है। ये  त्योहार वहां मनाया जाता है जहां संत, शहीद लोगों को दिल से याद किया जाता है। उन आत्माओं के लिए इस दिन वो प्रार्थना करते हैं जोकि स्वर्ग तक नहीं पहुंची है।

क्या है इतिहास ?

इसके इतिहास की बात करें तो 2,000 सालों से ज्यादा पुराना है। इस दिन कुछ लोग मोमबत्तियों को जलाते हैं और चर्च भी जाया करते हैं। इस दिन कुछ ईसाई तो मांस खाने से भी बिल्कुल परहेज करते हुए नजर आते हैं। इसकी शुरुआत कैसे हुई इसको लेकर कई तरह के सिद्धांत हैं। कुछ विद्वानों का ये कहना है कि ये ईसाई रुट्स से जुड़ा हुआ है। इसका संबंध फसलों के त्योहार यानी सामहैन से है। जिसका मतलब है ग्रीष्म का अंत। यह फसल के मौसम के अंत का जश्न कहलाता है। गल्स का ये मानना है कि इस वक्त जीवित और मरने हुए लोगों की दीवार छोटी हो जाती है और वो जीवन में वापस एंट्री कर लेते हैं। मरे हुए व्यक्ति से फसलों को पहुंचने वाले नुकसान के खतरे को देखकर ही गल्स स्टॉक करते हैं। ऐसा सर्दियों की तैयारी के लिए किया जाता है। साथ ही मृत आत्माएं खुश हो जाए इसके लिए भी ये होता है।

ऐसे मनाते हैं हैलोवीन

हैलोवीन में ट्रिक या ट्रीट का चलन काफी जबरदस्त तरीके से हैं। इसका अभ्यास 16वीं शताब्दी में आयरलैंड और स्कॉटलैंड में हुआ है। जहां पर लोग घर जा-जाकर अलग-अलग डरावनी पोशक पहनते हैं और खाने के लिए अपनी कविता या फिर गाने को एक्सचेंज करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि लोग आत्माओं से खुद को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे करते हैं। कई बच्चे तो घर जाकर अपने पड़ोसियों से कैंडीज भी लेते हैं। साथ ही कई लोग तो इसके लिए स्पेशल पार्टी रखते हैं और अपने घरों को सजाते हैं।

कद्दू से ये है ताल्लुक

इस दिन कई लोग कद्दू को अंदर से खाली कर देते हैं और उसमें डरावने चेहरे बनाते हैं और मोमबत्ती जालकर अंदर रख देते हैं। दुनिया के अंदर कई देशों में तो हैवोलीन के दिन घर के बाहर लोग अंधेरे में पेड़ों पर कद्दू लटका देते हैं। वहीं, जब त्योहार खत्म होता है तो कद्दू को दफना दिया जाता है जोकि अपने आप में हैरानी वाली बात है।