हॉकी के जादूगर क्यों कहे जाते हैं मेजर ध्यानचंद, जानिए जिंदगी से जुड़ी अनोखी बातें

हॉकी के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले पूर्व खिलाड़ी और जादूगर के नाम से मशूहर मेजर ध्यानचंद का आज 114वां जन्मदिन हैं। इसके अलावा काफी लंबे समय से मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग उठती रही है। तो चलिए जन्मदिन के खास मौके पर उनसे जुड़ी कुछ कहानियो

क्या आप जानते हैं?

- मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था

- ध्यानचंद के पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी में एक सूबेदार के पद पर कार्यरत थे

- ध्यानचंद को शुरूआत में हॉकी खेलना पसंद नहीं था, उन्हें रेसलिंग में रूचि थी

- ध्यानचंद रात के समय में अभ्यास करते थे, इसलिए साथी खिलाड़ियों ने चांद नाम दिया 

- उस टूर्नामेंट में ध्यानचंद ने 14 गोल किए, और एम्सटर्डम से ही मिला हॉकी का जादूगर नाम

-  हॉलैंड में एक मैच के दौरान चुंबक होने की आशंका के कारण मेजर ध्यानचंद की  स्टिक तोड़कर देखी गई

- हॉकी के महान खिलाड़ी ध्यानचंद ने अतंरराष्ट्रीय हॉकी में 400 गोल दागे, और अपने खेल से दुनियाभर को हैरान किया

- ध्यानचंद का 3 दिसंबर 1979 को दिल्ली में निधन हुआ, उनका अंतिम संस्कार उसी मैदान पर हुआ, जहां वह हॉकी खेला करते थे

- उस खास मूर्ति को लगाने का उद्देश्य यह  है कि उनकी हॉकी में कितना जादू था

- ध्यानचंद ने ओलंपिक खेलों में 101 गोल और अंतरराष्ट्रीय खेलों में 300 गोल दाग कर ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे कोई तोड़ नहीं पाया है

- दिल्ली में उनके नाम पर हॉकी स्टेडियम का उद्घाटन भी किया गया, इसके अलावा भारतीय डाक सेवा ने भी ध्यानचंद के नाम से टिकट चलाई