दर्जी कन्हैया लाल की नृशंस हत्या के मामले में उदयपुर के महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक सहित भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 32 अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है. निलंबित भाजपा नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में एक सोशल मीडिया पोस्ट पर धमकियों की शिकायत करने के बाद 48 वर्षीय को सुरक्षा प्रदान नहीं करने के लिए उदयपुर पुलिस की कड़ी आलोचना हुई, जिसकी पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी से बड़े पैमाने पर आक्रोश फैल गया.
कन्हैया लाल की जान बच सकती थी क्या ? मुझे लगता है बिलकुल बच सकती थी जान अगर राज्य सरकार ने इस पर ध्यान दिया होता तो..... अगर पुलिस प्रशासन एक्टिव होता तो शायद आज दर्जी कन्हैया लाल ज़िंदा होते.. दोस्तों कन्हैयालाल की हत्या नहीं ये भरोसे की हत्या है, इंसानियत की हत्या है.
उदयपुर में हुई कन्हैया लाल की दरिंदगी से हुई हत्या के बाद हर कोई सन्न है. कट्टरता से हर कोई डरा हुआ है.. हत्या इतनी हैवानियत से हुई की कन्हैयालाल के शरीर पर 26 बार छुरे से वार किया गया था. पोस्टमार्टन रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर को 13 जगह पर गहरा काटा था.... दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है.. हत्यारे रियाज और मोहम्मद गौस मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन दावते इस्लाम से जुड़े हैं. दावते इस्लामी पाकिस्तान के कराची से चलने वाली चैरिटी के नाम पर बनी संस्था है... दावते इस्लामी संगठन दुनियाभर में कुरान और सुन्नत का प्रचार करता है. दुनियाभर में ये संस्था 30 से ज्यादा कोर्सेज चलाता है. ये हत्यारे इसी संगठन के ऑनलाइन कोर्स से जुड़े थे... दावते इस्लामी की वेबसाइट भी चलती है और मदनी नमक टीवी चैनल भी हैं....ये आरोपी पाकिस्तान में दावते इस्लामी का 3 दिन का सेमिनार भी अटेंड करके आ चुके हैं.... देख रहे हैं भारत देश में सबको कितनी अजादी मिली हुई है... और सुनिए इनके हैड ऑफिस दिल्ली और मुंबई में भी है..... यह देखकर मेरे मन में कुछ सवाल आते है.... की क्या पुलिस को पहले से नहीं पता था शहर में रहने वाले इन आरोपियों के बारे में....
सरकार और विपक्ष अब पीड़ित परिवार को आर्थिक सहयोग दे रहा है..... कितना अच्छा होता अगर वो पहले ही कन्हैयालाल को सुरक्षा दे देते. दोस्तों उदयपुर हत्याकांड के बाद देश में चल रही मदरसों को लेकर भी केरला गवर्नर ने स्टेटमेंट दिया है,,, जब लक्षण आते हैं तो हम चिंतित होते हैं लेकिन गहरी बीमारी को नोटिस करने से इनकार करते हैं। मदरसों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है कि ईशनिंदा की सजा सिर काटना है. इसे भगवान के कानून के रूप में पढ़ाया जा रहा है ... जो सिखाया जा रहा है उसकी जांच होनी चाहिए.