परशुराम द्वादशी वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार परशुराम जी भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते है.
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कथाओं की माने तो इस दिन वैसे लोगों को व्रत करना ताहिए, जो काफी समय से संतान चाह रहें हो. इतिहास की बात करें तो ऋषि याज्ञवल्क्य ने एक राजा को इसी दिन के व्रत की सलाह दी थी जब वो राजा जंगल में एक संतान के लिए तपस्या कर रहा था. राजा ने जब इस दिन का व्रत किया तब उसकी मनोकामना पूरी हुई और उसे एक संतान हुआ जो भविष्य में जाकर नल नामक राजा के नाम से प्रसिद्ध हुआ.
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पुराणों में जितने भी भगवान विष्णु के अवतार की बात की गई है, उसमें से सिर्फ परसुराम अवतार ही अभी भी धरती पर मौजूद है, बाकि सारे अवतार अपने मकसद को पूरा कर वापस लौट चुके हैं.