स्पुतनिक के ऋषिकेश कुमार के अनुसार, अपहृत लोगों में कई अफगान सिख और नागरिक शामिल थे, लेकिन अधिकांश सामान्य भारतीय थे. महिलाओं और बच्चों समेत लोग दोपहर 1 बजे एयरपोर्ट पहुंचे थे, लेकिन अंदर नहीं जा सके.
हालांकि तालिबान ने आरोपों से इनकार किया है.
अतीत में कट्टरपंथी इस्लामी समूहों को बंधक बनाने की स्थितियाँ रही हैं. 2014 में, 46 भारतीय नर्सों के एक समूह को युद्धग्रस्त इराक में ISIS की कैद से छुड़ाया गया था. तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनके बचाव के लिए सऊदी अरब और इराक जैसे क्षेत्र के देशों के साथ राजनयिक चैनलों के माध्यम से मिलकर काम किया था.