दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीएम अरविंद केजरीवाला को पत्र लिखा है. पत्र में उपराज्यपाल ने हाल ही में दिल्ली विधानसभा में सीएम केजरीवाल द्वारा एलजी होता कौन है? की टिप्पणी का जिक्र करते हुए लिखा है, और कहा है कि ऐसे बयान का जिक्र करना ठीक नहीं है. इसके अलावा सीएम केजरीवाल की अगुवाई में दिल्ली विधानसभा से एलजी दफ्तर तक विधायकों और मंत्रियों के मार्च के बारे में कहा है कि उनके द्वारा मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को मिलने के लिए समय दिया. वो आते तो चाय-नाश्ता भी करवाते.
उपराज्यपाल झूठ बोलते हैं: केजरीवाल
वहीं सीएम केजरीवाल द्वारा मीडिया में बयान दिया कि उपराज्यपाल मिलना ही नहीं चाहते हैं. ये बात गलत है. जबकि इतने कम वक्त में 70/80 लोगों के लिए व्यवस्था कर पाना संभव नहीं था. उपराज्यपाल ने शिक्षा के मुद्दे पर भी घेरा है और दिल्ली सरकार के स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों के गिरते प्रतिशत का जिक्र भी किया गया है. इसके अलावा उपराज्यपाल ने चिट्ठी में लिखा है कि वो उनके के हेडमास्टर नहीं हैं. पिछले 7/8 साल से दिल्ली में ही रह रहे हैं. दिल्ली की उनकी भी फिक्र है.
'13 प्लॉट दिए पर एक भी स्कूल नहीं बनाया आपने'
डेटा देते हुए उपराज्यपाल ने आगे लिखा है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों का एनरोलमेंट 2014-15 की तुलना में 2019-20 में कम हुआ. उपराज्यपाल ने यह भी लिखा है कि मुख्यमंत्री को पिछली मीटिंग में उन्होंने बताया था कि 13 प्लॉट देने के बावजूद दिल्ली सरकार ने पिछले 8 सालों में एक भी नए स्कूल का निर्माण नहीं किया है. शिक्षा पर किए गए नेशनल अचीवमेंट सर्वे का जिक्र करते हुए उपराज्यपाल सक्सेना ने बताया है कि आठवीं क्लास तक 30% छात्र औसत से कम दर्जे के पाए गए हैं.
विधानसभा में सीएम ने बोला था हमला
बीते दिनों दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र को संबोधित करते हुए दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल पर जमकर हमला बोला था. सीएम ने कहा था कि ये बेहद गंभीर विषय है. जिस पर पूरे देश में चर्चा हो रही है कि चुनी हुई सरकार की चलनी चाहिए या फिर एक व्यक्ति विशेष की. मैं उपराज्यपाल से भी इस विषय पर मिलने गया. आज वही विस्तार में बता रहा हूं. उनको समझना चाहिए कि समय बड़ा बलवान है, हमेशा कुछ नहीं रहा है.
LG के पास स्वतंत्रता निर्णय लेने का अधिकार नहीं: सीएम
सीएम ने कहा था कि उपराज्यपाल के पास केवल पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड के अलावा किसी भी विषय पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के 4 जुलाई 2018 के जजमेंट के पैरा 284 में लिखा है कि दिल्ली के उपराज्यपाल के पास स्वतंत्रत निर्णय लेने का अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने ये बात दो बार लिखी. उससे ज्यादा सुप्रीम कोर्ट क्या कर सकता है? ये बात मैंने उपराज्यपाल को बताई तो उन्होंने कहा कि ये सुप्रीम कोर्ट की राय है. बताओ इतने बड़े संवैधानिक पद पर बैठा आदमी ऐसा कह रहा है, ये कोर्ट की अवहेलना है.