देश के 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. यूं तो पूरे देश की नज़र 5 राज्यों पर है, मगर पश्चिम बंगाल पर ज़्यादा है. इसके अलावा केरल पर भी नज़र है. केरल का चुनाव लेफ्ट के अस्तित्व के लिए बेहद ज़रूरी है. वामपंथियों के लिए अपना किला बचाना बेहद ज़रूरी है. देखा जाए तो लेफ्ट के लिए केरल आख़िरी उम्मीद है, जिसे बचाए रखना ज़रूरी है.
लेफ्ट के लिए सिर्फ केरल ही उम्मीद है
एक समय था जब पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा लेफ्ट का गढ़ हुआ करता था, मगर अब इन राज्यों में इनकी सरकार नहीं है. मतदान का दौर पूरा हो चुका है. आज चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश के नतीजे घोषित होंगे.
लेफ्ट के लिए ऐतिहासिक
वामपंथी के लिए Kerala Assembly Election ऐतिहासिक है. 2018 में लेफ्ट त्रिपुरा में अपने गढ़ से करीब ढाई दशक बाद बाहर हो गया था. पश्चिम बंगाल में अब स्थितियां कमजोर हैं और वो सत्ता का एक मजबूत दावेदार भी नहीं. संसद में भी लेफ्ट फ्रंट की स्थिति बेहद कमजोर है. लेफ्ट के लिए केरल का चुनाव बेहद ज़रूरी है.
लेफ्ट मुक्त भारत
भाजपा भले ही कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देख रही है, मगर सच्चाई है कि देश लेफ्ट मुक्त हो रहा है. हर राज्य से लेफ्ट का अस्तित्व संकट में है. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट के सामने केरल चुनाव अस्तित्व का सवाल भी है.
केरल में लेफ्ट के अच्छे दिन
केरल की जनता देश के अन्य जनता से ज्यादा साक्षर है. इसका लाभ सीधे पिनराई विजयन सरकार को मिल सकती है. इसके अलावा कोरोना वायरस के दौरान बेहतर तैयारियों का चुनावी लाभ मिल सकता है. पिनराई सरकार ने कोरोना काल में जनता के साथ संवाद बनाए रखा.
कांग्रेस मुश्किल में है
राहुल गांधी भले ही वायनाड लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर सांसद बने हैं, मगर उनकी लीडरशिप पर सवाल उठाया जा रहा है. निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर टॉप लीडरशिप को लेकर सवाल भी खड़े किए गए थे जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की स्थित पैदा हुई थी. अब देखना है कि राहुल गांधी के होने से फायदा मिलता है या नहीं.
केरल लेफ्ट के अस्तित्व के लिए बेहद ज़रूरी है. ऐसे में आज ही तय हो जाएगा कि इस राज्य में किसकी सरकार बनने जा रही है?