कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद भारतीय रेलवे के रेवेन्यू में आई भारी गिरावट

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए पहला लॉकडाउन लगाया गया था जिसके कारण 25 मार्च से नियमित ट्रेनें निलंबित हैं।

कोरोना वायरस महामारी ने देश के सभी वर्गों को प्रभावित किया है।  देश के ज्यादातर वर्गों में रेवेन्यू में गिरावट दर्ज हुई है। उसी के चलते रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ वीके यादव ने शुक्रवार को कहा कि नियमित यात्री ट्रेनों को निलंबित करने के कारण पिछले साल की तुलना में भारतीय रेलवे का राजस्व 87% कम हो गया है।आपको बता दें कि राजस्व पिछले वर्ष में 53,000 करोड़ से गिरकर इस वर्ष सिर्फ 4,600 करोड़ ही रह गया है।

यह भी कहा कि मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, राजस्व मार्च 2021 तक 15,000 करोड़ तक जाने की उम्मीद है। “सामान्य ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए एक निश्चित तारीख देना संभव नहीं है। अब तक यात्री राजस्व से हमारी आय 4,600 करोड़ है और साल के अंत तक, यात्री खंड से हमारी कुल कमाई लगभग 15,000 करोड़ होगी। पिछले वित्त वर्ष में यात्रियों से हमारी कमाई 53,000 करोड़ थी। उन्होंने आगे कहा यह कमाई पिछले साल की तुलना में 87% कम है।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में जो ट्रेनें चल रही हैं, उनमें भी, औसत अधिभोग लगभग 30% से 40% है, इससे ये पता चलता है कि लोगों में महामारी का डर अभी भी है। रेलवे हाल में केवल 1,089 विशेष ट्रेन का संचालन कर रहा है।  कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए पहला लॉकडाउन लगाया गया था जिसके कारण 25 मार्च से नियमित ट्रेनें निलंबित हैं।  

रेलवे ने शुक्रवार को अनावरण किए गए राष्ट्रीय रेल योजना के मसौदे के अनुसार, बेहतर बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक विकास योजनाओं के माध्यम से माल ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी को 27% से बढ़ाकर 2030 तक कर दिया है। 

उन्होंने कहा “विजन 2024 राष्ट्रीय रेल योजना का एक उप-समुच्चय है। उद्देश्य हमारे ग्राहकों के लिए पारगमन समय के साथ-साथ पारगमन लागत को कम करना है। हम माल भाड़े को युक्तिसंगत बनाने की योजना बना रहे हैं, धीरे-धीरे ढुलाई शुल्क कम करें, ताकि हम लागत कम कर सकें, राजस्व बढ़ा सकें।"