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 फ्रांस के नए बिल को लेकर जमकर मचा बवाल, मस्जिदों और इमामों पर कड़ी होगी निगरानी

फ्रांस के नए बिल को लेकर जमकर मचा बवाल, मस्जिदों और इमामों पर कड़ी होगी निगरानी

फ्रांस की ओर से एक नया बिल इस वक्त सुर्खियों में बना हुआ है, जिसकी चर्चा इस वक्त हर जगह चलती हुई नजर आ रही है।

फ्रांस की तरफ से इस्लामिक कट्टरवाद पर लगाम लग सके इसको लेकर सख्त कदम उठाए गए हैं। बुधवार के दिन फ्रांस सरकार एक बिल लेकर आई, जिसमें कई ऐसे बदलवों और बातों का जिक्र किया गया जो राष्ट्र को कमजोर बनाने का काम कर रही है। आइए आपको बताते हैं कि नए बिल के मुताबिक आखिर कौन सी चीजें होने वाली है, जिसके चलते फ्रांस में बदलने वाला है सब कुछ। 

- तीन साल की उम्र के बच्चों को स्कूल भेजना अनिवार्य होगा और सरकार द्वारा मस्जिदों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

- इतना ही नहीं फंडिंग पर ध्यान देने की बात इसमें रखी गई है। 

- जो प्रस्तावित कानून है उसके जरिए बच्चों को घर या फिर मस्जिदों में पढ़ाई करने से रोका जाएगा।

- बिल में यहां तक की पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग से स्विमिंग पूल्स की व्यवस्था को खत्म करने की भी बात रखी गई है।

-इसके साथ ही बिल में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि पूजास्थल के तौर पर मस्जिदों को रजिस्टर कराया जाएगा।

- उन्हें जो मदद मिलती है और इमामों की जो ट्रेनिंग है उस पर भी नजर रखी जाएगी।

- इतना ही नहीं मस्जिदों को चंदे के तौर पर 10 हजार यूरो दिया जाएगा। इससे बड़े चंदे के लिए लेनी होगी इजाजत।

- इसके अलावा बिल के मुताबिक भेदभाव, नफरत या हिंसा के मुजरिम घोषित कर दिए गए आदमी को मस्जिद में जाने से रोकने का हक होगा।

- वहीं, जो इंटरनेट पर नफरत फैलाने वाले कंटेट का इस्तेमाल कर रहा है उसके खिलाफ भी कानून बनेंगे।

- साथ ही जो सरकारी अफसरों को महजब के आधार पर डराने और धमकाने का काम करेगा उसको जेल की सजा का भी प्रोविजन इसमें शामिल है।

सही शिक्षा से होगी बदलाव की शुरुआत

इन सभी चीजों को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुअल मैक्रों का कहना है कि ये जो बिल है वो राष्ट्र को कमजोर बना रहे अलगाववादियों को पूरी तरह से खत्म करने में मददगार साबित होगा और इसकी शुरुआत बच्चों को सही शिक्षा प्रदान करने से होगी।

इस घटना के बाद हिल उठा फ्रांस

पेरिस में जो घटना घटी थी उसके बाद से ही मैक्रों इस्लामिक आतंकवाद के  खिलाफ आवाज उठा रही है। यहीं वजह है कि पाकिस्तान और तुर्की के साथ-साथ कई मुस्लिम देशों ने उनको लेकर एक मोर्चा खोल दिया है।