रिलायंस इंफ्रा कंपनी को दिल्ली मेट्रो रेल कॉपोरेशन हज़ारों करोड़ों रुपये देने को तैयार है लेकिन फिर भी विवादों का सिलसिला आगे बढ़ता ही जा रहा है. दोनों कंपनियों के बीच अभी तक कितनी देनदारी बनती है फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है और इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय 22 दिसंबर को अपना फैसला बता सकता है.
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वैसे तो सर्वोच्च न्यायालय डीएमआरसी के खिलाफ फैसला दे चूका है लेकिन रिलायंस इंफ्रा ने इस फैसले को लागू करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. हाई कोर्ट ने डीएमआरसी को फटकार लगाते हुए कहा है कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने आपके खिलाफ फैसला सुना ही दिया है तो फिर क्यों आप पैसा का भुगतान करने में विलंब किए जा रहे है. इस बात पर डीएमआरसी का कहना है कि उन्हें रकम की गिनती के लिए और वक़्त चाहिए. रिलायंस को 1000 करोड़ तो हम 48 घंटे में चूका दें, लेकिन बची हुई रकम को चुकाने के लिए हमें वक़्त चाहिए.
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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिलायंस इंफ़्रा ने दिल्ली एक्सप्रेसवे मेट्रो के संचालन के लिए 2008 में एक यूनिट का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था, जिसके बाद 2012 में कुछ धन को लेकर दोनों कंपनियों में आपसी सहमति के कमी की वजह से रिलायंस ने दिल्ली एक्सप्रेस मेट्रो से अपना नाता तोड़ लिया और कथित उलंघन के लिए दिल्ली एयरपोर्ट के खिलाफ आबृतिओं का केस फाइल कर दिया और टर्मिनेशन फीस देने की मांग की.
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इसी वर्ष के सितम्बर में सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी के रिलायंस इंफ़्रा को इस केस में जीत दें दी और दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो पर 2800 करोड़ रुपये का हर्ज़ाना ब्याज के साथ भरने को कहा, जिसका मतलब कुल रकम 5800 करोड़ रुपये होते है.